चुनाव कार्यालय पर सरकार संरक्षित अराजकता सरकार शर्मनाक, आरोपियों पर कार्रवाई करे सरकार : जयराम ठाकुर

शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं, वरिष्ठ पदाधिकारियों और मंत्रियों के समूह द्वारा चुनाव विभाग के कार्यालय पर हमला, कर्मियों से अभद्रता, सरकारी संपत्ति को नुकसान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाए जाने की घटना बहुत शर्मनाक है। इस घटना को अंजाम देने वालों के ख़िलाफ़ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। संवैधानिक पदों पर बैठे मंत्रियों के समूह की अगुवाई में संवैधानिक संस्था पर हुआ यह हमला हिमाचल के लिए काला अध्याय है। हैरानी की बात यह है कि चुनाव आयोग पर मंत्री सवाल उठा रहे हैं जो उसी प्रक्रिया से चुनकर मंत्री बने हैं। सरकार चला रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेसी नेता चुनाव विभाग के ऑफिस में खड़े होकर कार्यालय फूंकने की धमकी दे रहे हैं? क्या सत्ता के संरक्षण में कांग्रेसी नेताओं को इस हद तक छूट मिली है कि वह कहीं आग भी लगा देंगे तो क्या उन्हें कोई रोकेगा नहीं? उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी? जिस तरह से सुक्खू सरकार में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ एफआईआर हुई और कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिस तरह से अराजकता फैलाने की खुली छूट मिली है, वह बहुत ख़तरनाक है। क़ानून को ताक पर रखने वालों और उसे अनदेखा करने वाले बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। बिलासपुर के घुनमारवीं में २२ दिन अनशन पर बैठने के बाद भी भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ अनर्गल टिप्पणी करने वालों के ख़िलाफ़ मुक़दमा तक दर्ज नहीं हुआ।

जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस राहुल गांधी को रीलांच करने के लिए अराजकता पर उतर आई है। कांग्रेस को समझना चाहिए कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर, भाजपा के नेताओं के ख़िलाफ़ अनर्गल आरोप लगाकर राहुल गांधी की रीलांचिंग नहीं हो सकती है। देश को नरेंद्र मोदी और उनकी गारंटी पर भी भरोसा है। तभी उन्हें लगातार सेवा का अवसर दे रही है।

बिना डॉक्टर्स के कैसे होंगी जाँचें? मशीनों से काम लेने के बजाय मशीनें खरीदने में क्यों है सुक्खू की दिलचस्पी?

जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश के लोगों के भले के बजाय मित्रों के भले पर फोकस कर रहे हैं, इसलिए प्रदेश के अस्पतालों में डॉक्टर्स के बजाय मशीनों को बढ़ाने पर ही फोकस कर रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा दिए गए आर्थिक सहयोग से मुख्यमंत्री और उनकी मित्र मंडली मशीनें खरीदने पर खूब जोर दे रही है, यदि डॉक्टर्स नहीं होंगे तो मशीनें काम कैसे करेंगी? मुख्यमंत्री ने एमआरआई मशीनें खरीद लीं, लेकिन वे डॉक्टर्स नियुक्त करना भूल गए। नेर चौक मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट में इस समय एक भी रेगुलर कंसल्टेंट डॉक्टर नहीं है। जब मुख्यमंत्री को नेरचौक मेडिकल कॉलेज जाने का समय लगा तो अपने दौरे के एक दिन पहले एक डॉक्टर को डेजिग्नेटेड असिस्टेंट प्रोफेसर बनाकर नियुक्ति कर दी। आखिर एक ही डॉक्टर से सारे काम कैसे होंगे?

व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर सिर्फ़ मज़ाक़ हो रहा है। झूठ बोलकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। हैरानी इस बात की है कि मुख्यमंत्री के पास ही स्वास्थ्य शिक्षा विभाग भी है, इसके बाद भी उन्हें कुछ पता नहीं लग रहा है। उन्होंने कहा कि एमआरआई मशीन फरवरी में ही लग गई है लेकिन सात महीने बाद उद्घाटन हुआ। मशीन गारंटी का समय कम हुआ और वार्षिक रखरखाव अनुबंध का पैसा भी बेकार गया। आखिर मुख्यमंत्री को मशीनों से काम लेने से ज़्यादा दिलचस्पी मशीनें ख़रीदने में क्यों है?