देश भर में अब तक  करीब 5.5 करोड़ स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए: येसो नाइक

हिमाचल प्रदेश में भी अब तक आठ लाख स्मार्ट मीटर लगे

राज्य में सभी 28 लाख विद्युत उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर लगाने का है लक्ष्य

विद्युत और नवीन एवं नवीनकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री, श्रीपद येसो नाइक ने कहा है कि पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आर डी एस एस) के तहत देश भर में लगभग 5.5 करोड़ स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं। वर्ष 2023 में, केंद्र सरकार ने 3,03,758 करोड़ रुपये की परिव्यय वाली इस योजना को वर्ष 2021-22 से वर्ष 2025-26 तक के लिए शुभारम्भ किया था।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में भी रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, क्योंकि यह केंद्र सरकार की स्कीम है और राज्य ने भी इसे अपनाया है।

 हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड ने 2019 में शिमला और धर्मशाला शहरों में इंटेग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम IPDS ke तहत स्मार्ट मीटर लगाना शुरू किया था। इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 151,740 स्मार्ट मीटर लगाने का प्लान था, जिसमें से 118,581 शिमला में और 33,159 धर्मशाला में लगाने का प्रस्ताव था। यह प्रोजेक्ट 2022-23 में पूरा हुआ। अब, RDSS के तहत धीरे-धीरे सभी 28 लाख मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदला जाना है, और अब तक हिमाचल प्रदेश में लगभग 8 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।

श्री श्रीपद येसोनाइक ने कहा कि केंद्र सरकार का इस योजना को शुरू करने का उद्देश्य विद्युत प्रणाली में तकनीकी व वाणिज्यिक हानियों का कम करना , डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाना, सप्लाई-एवरेज रेवेन्यू रियलाइज्ड (ए सी एस ए आर आर) अन्तर की औसत लागत को खत्म करना और बिलिंग शुद्धता में सुधार करना है। इसके लिए 20 करोड़ प्रीपेड स्मार्ट मीटर के जरिए पारम्परिक मीटर को बदलना है। उन्होंने आगे कहा कि इस पहल का उद्देश्य वितरण क्षेत्र को आधुनिक बनाना है।

 योजना के तहत राजस्व और परिचालन दक्षता में सुधार के लिए 20 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटरिंग इस सुधार कार्यसूची में सबसे बदलाव लाने वाले हिस्सों में से एक है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर रियल-टाइम एनर्जी अकाउंटिंग, सही बिलिंग, कम मानव हस्तक्षेप और ज्यादा उपभोक्ता अधिकारिता के लिए विशेष हैं। अग्रिम भुगतान (प्रीपेड फंक्शनैलिटी) से वितरण कंपनियों पर वित्तीय दवाब कम होता है और बिजली की लागत भी कम आती है। मंत्री श्रीपद येसोनाइक ने कहा कि स्मार्ट मीटर हाई-रिजॉल्यूशन डेटा देते हैं जो रूफ टॉप सोलर और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती मांग के साथ मांग पूर्व-अनुमान और गतिशील विद्युत भार स्वरूप को प्रबन्धन करने में ए0आई0 का इस्तेमाल करने के लिए आवश्यक है।

अब तक देश में 5.5 करोड़ से ज्यादा मीटर लग चुके हैं। जिसमें बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्य आगे हैं, जबकि ओडिशा जैसे दूसरे राज्यों ने धीरे-धीरे प्रगति की है। उन्होंने कहा कि पूर्व केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने पहले हेंड बिल आधारित देय प्रणाली को खत्म करने के लिए तीन साल के अंदर स्मार्ट प्रीपेड मीटर आवश्यक करने पर जोर दिया था। ऊर्जा मंत्रालय इस बात पर जोर देता है कि यह बदलाव विद्युत क्षेत्र को भारत के पहाड़ी राज्यों सहित हर राज्य में प्रतिक्रिया शील से उत्पादक, स्मार्ट नेटवर्क में बदल देगा। उन्होंनेे विद्युत भार से निपटने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया।