बिना मंत्रिमंडल के गठन के ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चलाया था तालाबंदी का अभियान : जयराम ठाकुर

विधानसभा स्थित कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू “लाॅक प्रिय” मुख्यमंत्री हैं। उन्हें तालाबंदी में सुकून मिलता है। इसीलिए सत्ता संभालने के पहले ही दिन प्रदेश में 1000 से ज्यादा संस्थान बिना किसी समीक्षा के राजनीतिक प्रतिरोध की भावना से बंद कर दिए। और अब तक तक आंकड़ा ढाई हजार को पार कर चुका है। संस्थानों को बंद करने के लिए मुख्यमंत्री सुक्खू ने शपथ लेने के बाद मंत्रिमंडल के गठन का भी इंतजार नहीं किया। अब  वह संस्थाओं को बंद करने के पीछे नीड बेस असेसमेंट का राग अलाप रहे हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि मुख्यमंत्री बनने के 1 दिन के भीतर ही उन्होंने कौन सा सर्वे करवा लिया, जिसके आधार पर उन्होंने तालाबंदी का यह अभियान चलाया। इसके बाद उन्होंने संस्थानों में से 123 संस्थान पुनः खोल दिए। जो संस्थान पूर्व में भाजपा की सरकार ने खोले थे, वह स्थानीय लोगों और जन प्रतिनिधियों की मांग पर खोले गए थे। लेकिन मुख्यमंत्री नए संस्थान खोल नहीं सकते थे, इसलिए उन्होंने पहले से चले संस्थानों को बंद करने को ही अपनी नीति बनाई।

जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री आज भी उस तालाबंदी को अपने कुतर्कों द्वारा सही साबित करना चाहते हैं। वह कहते हैं कि कई विद्यालय उन्होंने इसलिए बंद किए क्योंकि वहां पर एक शिक्षक थे। यदि शिक्षक कम थे तो शिक्षकों की भर्ती करनी चाहिए। 31 अगस्त को शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि  प्रदेश में जेबीटी और टीजीटी के ही लगभग 6000 पद खाली हैं। प्रदेश में 3214 ऐसे विद्यालय हैं, जहां पर सिर्फ एक शिक्षक की तैनाती है। जब विद्यालय में शिक्षक नहीं रहेंगे तो छात्र संख्या स्वतः घटेगी। छात्र संख्या के घटते ही मुख्यमंत्री संस्थान को डिनोटिफाई कर देंगे। सुक्खू सरकार के व्यवस्था परिवर्तन का यही मॉडल काम कर रहा है। सबसे बड़ी बात है कि मुख्यमंत्री का यह अभियान अभी रुका नहीं है। इसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस के विधायक ही उन्हें अपने हलके में बुलाने से बचते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि मुख्यमंत्री को यदि पता चल गया कि यहां पर पूर्व सरकार द्वारा खोला गया कोई संस्थान है तो मुख्यमंत्री उसे भी डिनोटिफाई कर सकते हैं। मुख्यमंत्री को संस्थान बंद करने, सुविधाएं छीनने, योजनाओं को बदनाम करने की सनक सवार है। उसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि उनके चार साल का कार्यकाल लगभग बीत चुका है और जनता के बीच जाकर बताने के लिए उनके पास अपनी एक भी उपलब्धि नहीं है। इसीलिए वह साजिश की राजनीति करते हैं और भाजपा सरकार की सबसे पॉपुलर स्कीम को भी बदनाम करने का कुत्सित प्रयास करते हैं। प्रदेश के लोग सब जानते हैं, उनका कोई भी पैंतरा अब काम आने वाला नहीं है।